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कफ दोष, ‘पृथà¥à¤µà¥€â€™ और ‘जल’ इन दो ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से मिलकर बना है। ‘पृथà¥à¤µà¥€â€™ के कारण कफ दोष में सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ और à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨ और ‘जल’ के कारण तैलीय और चिकनाई वाले गà¥à¤£ होते हैं। यह दोष शरीर की मजबूती और इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में सहायक है। कफ दोष का शरीर में मà¥à¤–à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पेट और छाती हैं।
कफ शरीर को पोषण देने के अलावा बाकी दोनों दोषों (वात और पितà¥à¤¤) को à¤à¥€ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करता है। इसकी कमी होने पर ये दोनों दोष अपने आप ही बॠजाते हैं। इसलिठशरीर में कफ का संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ अवसà¥à¤¥à¤¾ में रहना बहà¥à¤¤ ज़रूरी है।
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में कफ दोष को विषेश महतà¥à¤¤à¤µ दिया गया है। यह दोष आपकी इमà¥à¤¯à¥‚निटी को बढ़ाने में काफी सहायक माना जाता है। कफ दोष को मà¥à¤–à¥à¤¯ दोष माना जाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह अनà¥à¤¯ दोनों दोषों वात और पितà¥à¤¤ को à¤à¥€ संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रखता है। हालांकि कफ को तीनों की अपेकà¥à¤·à¤¾ में à¤à¤¾à¤°à¥€ à¤à¥€ माना जाता है। असंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ जीवनशैली और खराब खान पान के कारण शरीर में कफ दोष बढ़ जाता है। शरीर को रोगों से बचाने के लिठकफ दोष का संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रहना अति आवशà¥à¤¯à¤• है।
कफ बढ़ने के कारण (Causes of Increased Kapha)
तैलीय पदारà¥à¤¥ कफ की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ाने के लिठअधिक जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होते हैं। तैलीय पदारà¥à¤¥ का सेवन करने से शरीर में कफ की मातà¥à¤°à¤¾ जलà¥à¤¦à¥€ बढ़ जाती है। इसमें बाहर का खाना, नमकीन, कोलà¥à¤¡ डà¥à¤°à¤¿à¤‚क का सेवन और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मीठा खाना शामिल है।
ठंडी चीजें à¤à¤• तरह से कफ की दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ मानी जाती हैं। अकà¥à¤¸à¤° लोग जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ठंडा पानी पी लेते हैं या फिर बारिश के मौसम में à¤à¥€à¤—ने से à¤à¥€ शरीर में कफ की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ सकती है।
ओवरईटिंग करने से शरीर में अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में कैलरी जमा होती है, जो कफ दोष को बढ़ा देती है।
दूध, दही और घी जैसे तैलीय पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के सेवन से à¤à¥€ शरीर में कफ की मातà¥à¤°à¤¾ असंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ होकर बढ़ जाती है। इसलिठदूध और दही à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में लेना नà¥à¤•सानदायक हो सकता है।
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